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RANGVARTA : an e-magazine for Indian Theatre                                                       on STAGE


यह नजरिया नया नहीं है

हिंदी में पहली बार भारत की जनपक्षीय रंगपरंपरा को अग्रगति देने वाले क्रांतिकारी रंगकर्मी गुरशरण सिंह के नाटकों का संकलन अभी पिछले महीने ही प्रकाशित हुआ है. गुरशरण सिंह के नाटक हिंदी व अन्य भाषाओं में प्रकाशित हुए हैं लेकिन किसी ने उनके नाटकों को हिंदी में एकमुश्त लाने की कोशिश नहीं की. यह काम परमानंद शास्त्री के प्रयत्नों से वर्षों बाद साकार हुआ है.
-अश्विनी कुमार पंकज

Back STAGE


मेलबर्न 7 और नेड केली की दास्‍तान

एक घंटे के नाटक का मंचन देखकर मैं मंत्रमुग्‍ध हो गया. यह नाटक नेड की जिन्दगी पर फांसी स्थल पर होता है.

अंतरराष्ट्रीय रंगमंच पर इरोम चानु शर्मिला

दक्षिण कोरिया के अंतरराष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव में इरोम चानु शर्मिला पर मंचित मूक नाटक को भरपूर प्रशंसा मिल रही है.

न्यू मीडिया पर छिड़ी जिरह

गरीबी अमीरी की खाई लगातार बढ़ती जा रही है। 80% लोगों के लिए सत्ताधारी वर्ग कोई जबावदेही नहीं महसूस करते।

रंगमंच के लिए छोड़ दी थी नौकरी

वे एक मैगजीन में लेआउट आर्टिस्ट थे और रंगमंच के लिए उन्होंने नौकरी से रिजाइन किया था।

 

Arena Theatre


‘जय भीम’ के कलाकार जेल में हैं, उन्हें रिहा किया जाए - पटवर्द्धन

शीतल साठे कबीर कला मंच की प्रमुख दलित संस्कृतिकर्मी है. महाराष्ट्र पुलिस के मुताबिक शीतल और उसके सांस्कृतिक संगठन का नक्सलियों से संबंध है. इसी आरोप में मंच के दो सदस्यों को 12 मई 2011 में गिरफ्तार कर लिया गया. इस गिरफ्तारी के बाद अपने चार साथियो के साथ शीतल अंडरग्राउंड हो गई. उसके घरवालों की आशंका कुछ और है और वे पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं.
- अश्विनी कुमार पंकज

Theatre History and Review


कोलकाता का हिंदी रंग इतिहास

कोलकाता में हिन्दी नाट्य प्रस्तु्तियों का इतिहास लगभग एक शताब्दी पुराना है । 1906 में पहली बार मुंशी भृगुनाथ वर्मा के नेतृत्व में फूलकटरा में हिन्दी नाट्य समिति की स्थापना हुई ।

एक नई मेनका का मंचन चैन्ने में भी

विभा का विश्वास है कि थिएटर लोगों को शिक्षित और सुसंस्कृत बनाने का सर्वोत्तम तरीका है. इसके माध्यम से लोग अपने अपने जीवन व कार्यक्षेत्र के शीर्ष पर पहुँच सकते हैं.

Posters


Shabana in Karnad's 'Broken Images'

"Pune-Highwat" by Rahul da Cunha



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‘रंगवार्ता’ का ‘रंगमंच पर स्त्री छवियां’ विशेषांक बस छपकर आने ही वाला है. सीमित प्रतियां हैं इसलिए अपना आदेश 150/- रु. सहित तुरंत भेजें ताकि पत्रिका का यह विशेष अंक हम आपके लिए सुरक्षित कर सकें. ...और आगे देखें


 

विश्व रंगमंच दिवस संदेश
27 मार्च 2012

- जॉन मायकोविच
(रंगकर्मी, अमरीका)

आप तंगहाली, सेंसरशिप, ग़रीबी और अंधेरों को पराजित करेंर

आपका का काम मौलिक, अकाट्य व विचलित करने वाला हो| संवेदनशील, गहन, विचारशील और विशिष्ट हो| वो हमें इस प्रश्न पर विचार करने के लिए प्रेरित करे कि मनुष्य होने का तात्पर्य क्या है, और यह विचार निष्कपट हो, स्पष्ट हो, संवेदना व गरिमा से परिपूर्ण हो | आप तंगहाली, सेंसरशिप, ग़रीबी और अंधेरों को पराजित करें – जो आप में बहुत से लोग निश्चित रूप से करना चाहेंगे| आप प्रतिभा संपन्न व दृढ़ निश्चयी हों और हमें अपनी पूरी जटिलता के साथ धड़कते मानव हृदय के बारे बताएं - आपमें वो विनम्रता और उत्सुकता हो जो इस पथ को आपके जीवन का उद्देश्य बनाए | और आप में जो कुछ भी सबसे अच्छा है – क्योंकि वह केवल आप ही का सबसे अच्छा पक्ष होगा - और केवल तब बिरले और सूक्ष्मतम क्षणों में – आप उस मूलभूत प्रश्न को चिन्हित करनें में सफल हों, “हम कैसा जीवन जियें?” आपकी यात्रा सफल हो |” ( हिंदी अनुवाद : अखिलेश दीक्षित)


मानवता की सेवा में थियेटर

जेसिका ए. काहवा, युगांडा का संदेश 2011


रंगमंच जीवन का छुपा हुआ सत्य है

ऑगस्टो बोल का संदेश 2009

 

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